हर वो लम्हा, जो संजो कर रखा है…
मम्मा का आईडिया तो सही था :)
| पिछले कुछ दिनों से तबियत ख़राब होने की वजह से कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था. थोड़ी चिडचिडी भी हो गयी थी मैं. | |
| उस दिन हॉस्पिटल से आने के बाद भी मैं थोड़ी परेशान हो रही थी, तो मम्मा ने कहा की चलो इनको कहीं बाहर घुमा लाते हैं. जिससे थोडा फ्रेश फील करे. | |
| और हम पहुँच गए, भोपाल के वी.आई.पी रोड. वहां जाकर सचमुच मैंने बहुत एन्जॉय किया.
मम्मा का आईडिया तो सही था |
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| इन तस्वीरों में देखिये खुश लग रही हूँ ना… ? वहां से लौटे वक़्त गौहर महल में लगे हस्तशिल्प मेले में भी गए..
पर वहां की बातें अगले पोस्ट में… |
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तब तक के लिए बाय. - आपकी लवी
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#1 written by कुश अंकल 1 year agoवाह क्या मस्त जगह है.. ! इस बार बड्डे पे भोपाल आना पड़ेगा क्या..Reply Quote
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लविजा तो बहुत प्यारी लग रही है! इस पोस्ट की चर्चा तो यहाँ भी है- http://charchamanch.blogspot.com/2010/04/blog-post_07.html
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चर्चा मंच पर प्यारे-प्यारे, मस्त नज़ारे! शीर्षक के अंतर्गत इस पोस्ट की चर्चा की गई है! – संपादक : सरस पायस
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