हर वो लम्हा, जो संजो कर रखा है…
मिलिए मेरे दोस्त शेर खान से…
| मेरे दोस्त शेरू से मिलेंगे ? ये शेर खान है. जब हम दादू के घर गए थे ये मुझे वहां मिला था. |
| पहले तो मुझे इसके पास जाते हुए डर लगा था. इसलिए पहले इसे दूर दूर से ही देखा. |
| फिर थोडी देर में मैं कम्फर्टेबल हो गयी और जब लगा की ये मुझसे दोस्ती करना चाहता है तो मैंने भी इससे दोस्ती कर ली. |
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कुछ दोस्तों से तो आप पहले भी मिल चुके हैं. अच्छा फिर मिलते हैं… तब तक के लिए बाय… - आपकी लवी |
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#1 written by समीर लाल ’उड़न तश्तरी’ वाले 2 years agoअले बाप ले..इसे कहाँ से ले आई लवि बिटिया…अंकल तो डर ही गये.. :)Reply Quote
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