हर वो लम्हा, जो संजो कर रखा है…
धड़ाम…
कल की बात मैं बताऊँ आपको ! कल क्या हुआ मैं नानी के साथ कमरे में खेल रही थी और मम्मी दूसरे कमरे में कुछ काम कर रही थी, शायद पलंग के ऊपर चढ़ कर कुछ निकाल रही थी | मैं अपनी मस्ती में खेल रही थी | अचानक ही पता नही मुझे क्या सूझा, मैंने जोर की एक अजीब सी आवाज निकाली | और मम्मी भागी वहां से | पलंग पर रजाई रखी हुई थी | मम्मी का पैर रजाई से उलझा और .. और… और मम्मी धड़ाम से नीचे …………. लेकिन मैं क्या करूँ मैं तो ऐसा करती ही रहती हूँ| पर मम्मी को चोट तो बहुत लगी थी |
सॉरी मम्मी…

