DSC00385


१० फरवरी, जयपुर…. भोपाल जाने के पहले से ही खड़े होने की कोशिश शुरू कर दी थी मैंने और इस कोशिश में एक बार चोट भी लगा चुकी हूँ. वो तो मम्मी ने संभाल लिया था. पर मैं भी हार मानने वालों में से नही हूँ. कोशिश नही करुँगी तो सीखूंगी कैसे ?

DSC00383

दिन भर तो नानी को परेशान करती ही हूँ. पर कल पापा घर पर थे तो सोचा उनसे ही सीखती हूँ. कभी उनके कपडों को पकड़ कर खड़े होने की कोशिश की कभी अपने आप ही.

DSC00386

पापा ने बेड के पास बैठा दिया तो बेड पकड़ कर भी कोशिश की. एक दो बार गिर भी पड़ी पर मैंने कोशिश नही छोड़ी और देखिये मेरी कोशिश कामयाब भी हुई.

DSC00390

आजकल दिन भर मेरी धमा चौकडी तो चलती ही रहती है. और सब से ज्यादा मस्ती मुझे तब सूझती है जब सब एक साथ खाना खाने बैठते है. तब मैं कमरे में भागना शुरू करती हूँ और फिर किसी को उठना ही पड़ता है मुझे सँभालने.
DSC00391



मुझसे दोस्ती करोगे ?