हर वो लम्हा, जो संजो कर रखा है…
थोड़ा Recap हो जाए.

आपको तो पता है की अब मैं ९ महीने की हो चुकी हूँ. पिछले ९ महीनो में काफ़ी कुछ अच्छा हुआ. क्यूँ ना एक Recap हो जाए.
- अप्रैल – ३०-अप्रैल-०८, इस दिन सुबह के ५ बज कर ४५ मिनट पर भोपाल के हाफिज़ मेटरनिटी हॉस्पिटल में मेरा जन्म हुआ. अभी आपको उस वक्त की तस्वीरे नही दिखा पा रही हूँ. पर बहुत जल्द ही दिखाउंगी.
- जन्म के कुछ दिन बाद ही मुझे पीलिया हो गया था जो करीब १ महीने तक था.
- मई और जून तो भोपाल में ही गुजरा उसके बाद जुलाई में मेरे दादा-दादी मुझे लेने आए और मैं अपने दादा-दादी के घर आद्रा चली गई.
- जुलाई में मैं अपनी फुपी के घर गुडगाँव गई और फिर अगस्त में हम जयपुर आ गए. जयपुर आने के कुछ दिन बाद ही मेरी तबियत ख़राब हो गई. शायद यात्रा के वजह से.
- अगस्त में मैं ५ महीनों की हो चुकी थी तो उस उम्र के अनुसार मैंने धीरे धीरे पलटना और अपने खिलोने पकड़ना सीख लिया था. और हाँ दूध की बोतल भी मैंने पकड़ना सीख लिया था.
- मम्मी कहती है की मैं उस वक्त मुंह में ऊँगली लेती थी. पर मुझे तो याद नही. शायद…. लेकिन अब तो नही लेती.
- सितंबर और अक्तूबर में तो मैं अच्छी तरह पलटना और घुटनों के बल चलना सीख लिया था.
- नवम्बर आते आते तो मैंने बैठना भी सीख लिया और अब तो मुझे पकड़ना भी सबके लिए मुश्किल काम था. और वो तो अब भी है.
- दिसम्बर के आखरी दिनों और जनवरी में मैंने खड़े होने की कोशिश भी शुरू कर दी थी. अब बेड का सहारा लेकर मैं खड़ी हो जाती हूँ.
- इन सबके अलावा भी बहुत कुछ अच्छी चीजे हुई. और काफ़ी कुछ सीखा मैंने. टीकाकरण भी नियमित रूप से चल रहा है.
- इन ९ महीनो में यात्रा भी खूब की मैंने..कभी भोपाल, कभी आद्रा तो कभी गुडगाँव अपनी फुपी के पास.
बाकी बातें फिर कभी…