मैं भोपाल में
मैं भोपाल में

आपको याद है न भूले तो नही… आज पोलियो रविवार है. अपने घर के या घर के आस पास पाँच साल से छोटे बच्चो को लेकर जायें पोलियो बूथ. मैं तो मामू के साथ जाकर पी आयी दो बूँद ज़िन्दगी की. हाँ आयशा भी तो पॉँच साल से छोटी है ना. हम दोनों ही गए थे मामू के साथ पोलियो बूथ पर.

आज पापा आने वाले है मुझे लेने. काश पापा कल यहाँ होते तो मुझे खड़े होने की कोशिश करते हुए देख लेते. वैसे जयपुर में एक बार देखा था उन्होंने जब मैं पहली बार बेड पकड़ कर खड़े होने की कोशिश की थी और फिर गिरते गिरते बची. मम्मी ने संभाल लिया था मुझे.

मैं भोपाल में
मैं भोपाल में

अभी पापा भोपाल आने की तयारी कर रहे होंगे. और मुझे पता है उन्होंने मेरे लिए तो कुछ लिया ही होगा. वैसे पापा बस आप आ जाइये मुझे गिफ्ट की जरूरत नही है.

मम्मी ने मुझे बताया की आप कल विशाल मेगामार्ट गए थे मेरे लिए वाकर लेने. लाये तो नही ना, मत लाना पापा. वो मेरा एक दोस्त है ना आदित्य, उनके डॉक्टर ने बताया की वाकर अच्छा नही होता बच्चो के लिए. मम्मी ने पहले भी तो मना किया था न आपको फिर क्यूँ गए. 

अच्छा पापा, अब आप आ जाइये. मैं आपका वेट कर रही हूँ. फिर हम सब जयपुर चलेंगे. 

मैं भोपाल में
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