हर वो लम्हा, जो संजो कर रखा है…
Archive for March, 2009
दस में लक्स
4March 12, 2009
दस में लक्स, दस में लक्स… आपने भी देखा होगा ना ये कॉमर्शियल ऐड टीवी पर. ये मेरा फेवरिट कॉमर्शियल ऐड है. जब भी ये टीवी पर आता है मेरा ध्यान टीवी की ओर ही चला जाता है चाहे मैं कुछ भी कर रही हूँ. अगर मैं खाना खा रही हूँ, या खेल रही हूँ तब भी ये आवाज़ सुनते ही मेरी आँखें टीवी की ओर घूम [...]
कोशिश करने वालों की कभी हार नही होती
5March 11, 2009
पिछले कई दिनों से ड्रेसिंग टेबल के दराज में लगे कुंदे मुझे बहुत आकर्षित कर रहे थे. कुंदों को पकड़ कर मैं खड़े होने की कोशिश भी करती हूँ. तीन कुंदे तो मम्मी ने निकाल ही दिए क्यूंकि एक बार इनसे मुझे चोट लगते लगते बची थी.
ये बचे हुए दो उनसे निकल नहीं पाए. अच्छा है निकल जाते तो आज मेरा दराज [...]
कोशिश करने वालों की कभी हार नही होती
9March 11, 2009
पिछले कई दिनों से ड्रेसिंग टेबल के दराज में लगे कुंदे मुझे बहुत आकर्षित कर रहे थे. कुंदों को पकड़ कर मैं खड़े होने की कोशिश भी करती हूँ. तीन कुंदे तो मम्मी ने निकाल ही दिए क्यूंकि एक बार इनसे मुझे चोट लगते लगते बची थी.
ये बचे हुए दो उनसे निकल नहीं पाए. अच्छा है निकल जाते तो [...]
मम्मी की फेवरिट कविता
12March 8, 2009
आज मैं आपको मम्मी की फेवरिट कविता सुना रही हूँ. ये कविता मम्मी ने किसी ब्लॉग में देखा था. रचनाकार का नाम तो उनको भी नहीं पता. आपको अगर पता है तो जरूर बताना. तक़रीबन रोज़ ही पढ़ती है मम्मी इसको.
बच्ची का आना जैसे -
बेमौसम बादलों के पीछे से
सूरज का [...]
मेरी नयी दोस्त.
8March 6, 2009
लेजर वैली से आने के बाद लंच किया और फिर ज़ेबा बाजी और इशरत बाजी के साथ थोडी मस्ती की. तब तक शाम हो गयी थी तो हम घर के सामने वाले पार्क में टहलने चले गए थे. पर मुझे वहां ज्यादा मज़ा नहीं आया. क्यूंकि मुझे तो फर्श पर भागने में मज़ा आता है और पार्क की घास चुभ रही थी.
वैसे ज़ेबा बाजी और इशरत [...]