|

|
|
पिछले दिनों दादू मुझे और मम्मा को छोड़ने आये थे. तो हमने दिल्ली और आगरा घूमने का प्लान किया. दिल्ली तो मैं पहले भी घूम चुकी हूँ और मेरे दादू भी. तो हमने सिर्फ जामा मस्जिद जाने का सोचा, और वहां कुछ शॉपिंग भी करनी थी. अगले दिन सुबह ही हम एम जी रोड स्टेशन से मेट्रो में चांदनी चौक पहुँच गए. और वहाँ से जामा मस्जिद. फिर वहाँ ही हमने कुछ समय बिताया और बाहर शॉपिंग करने के बाद शाम को मेट्रो से लौट आये.
|
|
जामा मस्जिद गेट न० 2 पर |
|
जामा मस्जिद का निर्माण सन् 1656 में सम्राट शाहजहां ने किया था. यह पुरानी दिल्ली में स्थित है. यह मस्जिद लाल और संगमरमर के पत्थरों का बना हुआ है। लाल किले से महज 500 मी. की दूरी पर जामा मस्जिद स्थित है जो भारत की सबसे बड़ी मस्जिद है। इस मस्जिद का निर्माण 1650 में शाहजहां ने शुरु करवाया था। इसे बनने में 6 वर्ष का समय और 10 लाख रु.लगे थे। बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से निर्मित इस मस्जिद में उत्तर और दक्षिण द्वारों से प्रवेश किया जा सकता है। पूर्वी द्वार केवल शुक्रवार को ही खुलता है। इसके बार में कहा जाता है कि सुल्तान इसी द्वार का प्रयोग करते थे। इसका प्रार्थना गृह बहुत ही सुंदर है। इसमें ग्यारह मेहराब हैं जिसमें बीच वाला महराब अन्य से कुछ बड़ा है। इसके ऊपर बने गुंबदों को सफेद और काले संगमरमर से सजाया गया है जो निजामुद्दीन दरगाह की याद दिलाते हैं।
- आगे पढ़े…
|
|
|
जामा मस्जिद में कबूतरों को दाना चुगते देखते हुये.
|
|
और फिर अगले दिन आगरा के लिए हमने निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से ताज एक्सप्रेस पकड़ी और आगरा स्टेशन से सीधे ताज महल पहुँच गए. आगरा में हमने और भी ऐतिहासिक धरोहर देखे पर ज्यादा आकर्षण ताजमहल का ही था.
|
|

वहाँ जब सब तस्वीरें खींच रहे थे, तो फिर क्यूँ पीछे रहती
|
ताज महल मुगल वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। इसकी वास्तु शैली फारसी, तुर्क, भारतीय एवं इस्लामिक वास्तुकला के घटकों का अनोखा सम्मिलन है। सन् 1983 में, ताज महल युनेस्को विश्व धरोहर स्थल बना। इसके साथ ही इसे विश्व धरोहर के सर्वत्र प्रशंसित, अत्युत्तम मानवी कृतियों में से एक बताया गया। ताजमहल को भारत की इस्लामी कला का रत्न भी घोषित किया गया है।
इसका श्वेत गुम्बद एवं टाईल आकार में संगमर्मर से ढंका केन्द्रीय मकबरा अपनी वास्तु श्रेष्ठता में सौन्दर्य के संयोजन का परिचय देते हैं। ताजमहल इमारत समूह की संरचना की खास बात है, कि यह पूर्णतया सममितीय है। यह सन 1648 के लगभग पूर्ण निर्मित हुआ था। उस्ताद अहमद लाहौरी को प्रायः इसका प्रधान रूपांकनकर्ता माना जाता है।
- आगे पढ़े
|
|
मेरे दादू ताजमहल के पास |
|
|

|
|
मैं ज़ेबा बाजी और इशरत बाजी के साथ ताज महल में घुमते हुये.
|
|
|
|
और जब थक गए तो पापा के कंधे पर
|
| |
|
आप तो गए होंगे ताजमहल ? नहीं गए तो जरूर जाएँ. मैं चली स्कूल जाने की तैयारी करने…
आपसे फिर मिलती हूँ. तब तक के लिए बाय…
- आपकी लवी
|
| . |
| . |
| . |