6 बेबी सीक्रेट्स!
पढ़िए हम बच्चों के बारें में ६ सीक्रेट्स, जो इस विषय के विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर हैं और आज के राजस्थान पत्रिका में छपी है.
लविज़ा | Laviza
नन्हे-मुन्नों की नादानियों को आप हंसी में उड़ाते हैं। उनकी शरारतों को बचपना कहकर टाल देते हैं। पर आप भूल रहे हैं कि धीरे-धीरे वे आपको उंगलियों पर नचाने लगे हैं। अब वे अपना काम निकलवाने में माहिर हो चुके हैं। आपको उनकी साइकोलॉजी पर पैनी नजर रखनी होगी और जानने होंगे वे बेबी सीक्रेट्स, जिनसे वे शैतान हुए जा रहे हैं। तभी आप बन पाएंगे स्मार्ट पैरेंट्स।
आपका बेबी छोटा-सा फरिश्ता है और आप उससे बेहद प्यार करते हैं। लेकिन इस बात के लिए आपको सावधान होना ही होगा कि कहीं वह इस प्यार का गलत फायदा तो नहीं उठा रहा है। अगर उसकी हरकतों पर गौर करेंगे तो उसके अंदर एक छोटे-से शैतान को पाएंगे, जो अपनी छोटी-छोटी चालाकियों से काम निकलवाने में माहिर हो गया है। वह आपकी नहीं सुनता, दिनभर मनमानी करता है। आपका दिल दुखता है, पर आप कुछ समझ नहीं पातीं कि क्या करें, क्या नहीं। आपको बच्चे की गलत बातों को मानने की बजाय समझदारी से इस परेशानी से उबरना होगा।
गजब का एक्टर
आप शॉपिंग करने जाती हैं और बेटा किसी ना किसी चीज को खरीदने के लिए जिद करने लग जाता है। जब उसे मना किया जाता है तो वह शोर मचाकर तमाशा करने लग जाता है।
बालमन – बच्चा जानता है कि उसे किस मौके पर क्या करना है जिस समय आप उसे किसी बात से मना कर देते हैं तो वह जानता है कि उसे अगला स्टेप क्या उठाना है। वह जानता है कि अगर वह तमाशा करने लग जाएगा तो आप शर्मिदा होकर वह चीज दिलाने पर विवश हो जाएंगी।
कुछ यूं करें - साइकोलॉजिस्ट डॉ. कृष्णा कंवल का मानना है कि ऎसा करने पर बच्चों को आजाद छोड़ दें और उसके व्यवहार पर प्रतिक्रिया देना बंद कर दें। उसका ध्यान किसी दूसरी चीज पर लगा दें। इसके अलावा जब भी शॉपिंग करने के लिए जाएं तो उससे कहें कि अगर वह शैतानी नहीं करेगा तो घर आकर उसे सरप्राइज गिफ्ट मिलेगा।
बातें गोल-मोल
आपको बर्दाश्त नहीं कि आपका बच्चा पढ़ाई में जरा भी कमजोर हो। लेकिन जब आपको उसके मार्क्स उम्मीद के मुताबिक नहीं दिखते हैं, तो आप निराश हो जातेहैं। यही बात बच्चा भी जानता है, इसलिए वह बड़ी सफाई से झूठ बोल जाता है।
बालमन – सभी बच्चे कभी ना कभी झूठ बोल जाते हैं, चाहे खुद को सुरक्षित करने को हो या पैरेंट्स के गुस्से से खुद को बचाने के लिए या अपना इंप्रेशन डालने के लिए भी। कई बार वे नहीं चाहते कि पैरेंट्स को निराशा हो।
कुछ यूं करें - घर में ऎसा माहौल हो कि बच्चों को माता- पिता से झूठ बोलने की जरूरत ही ना पड़े। जब बच्चा आपसे कहे कि टेस्ट में अच्छे मार्क्स नहीं आए हैं तो उसे हंसकर स्वीकार करें। बच्चे की ईमानदारी पर उसे शाबासी दें। ध्यान रखें कि बच्चे पैरेंट्स को फॉलो करते हैं, इसलिए उसके सामने परिवार के दूसरे सदस्यो से कुछ छिपाने की कोशिश न करें।
दबंग बेटा
आपका बेटा दोस्तों से झगड़ा करता है और उनसे मारपीट करता है। यही हाल घर में भी है। कई बार समझाने पर भी वह नहीं समझता है।
बालमन – बहुत से बच्चे दोस्तों पर हावी होने की कोशिश करते हैं। बच्चे ग्रुप में सबका ध्यान अपनी ओर खींचना चाहते हैं। कई बार वे दादा बनने की कोशिश करते है। इस बारे में पीडियाट्रिक साइकोलॉजिस्ट डॉ. गौरव राजेंद्र कहते हैं, ‘बच्चे चाहते हैं कि उनके आस-पास सब कुछ उनके मुताबिक ही हो, जब उन्हें ऎसा माहौल नहीं मिल पाता, तो उसे वे खुद बनाने की कोशिश करते हैं। इसके लिए वे झगड़ालू हो जाते हैं। अपने ग्रुप में ही इस तरह की दादागिरी करते हैं, क्योंकि वहीं उनकी चल सकती है।’
कुछ यूं करें – बच्चे से बातचीत करके उसे इस बात से आश्वस्त कर लें कि वो खुद के अचीवमेंट्स से पूरी तरह से सेटिस्फाई हो जाए। घर में खुशीभरा माहौल हो, जिससे बच्चा हर समय खुश रह सके। ध्यान रखें कि आपकी परेशानी और तनाव बच्चे तक नहीं पहुंचे। बच्चे की हर बात सुनने के लिए हमेशा तैयार रहें और उसे जताएं कि आप उससे कितना प्यार करते हैं।
ईगो भरा है
कई बार देखा जाता है कि अगर बच्चा बहुत होशियार और समझदार है तो उसमें घमंड आ जाता है और वह खुद को बेस्ट समझने लगता है।
बालमन - इस तरह का व्यवहार पूरी तरह से खुद की बनाई इमेज या राय को अभिव्यक्त करता है। अगर वह खुद के अचीवमेंट को पॉजिटिव तरीके से लेगा तो वह एक अच्छे बच्चे की तरह बर्ताव करेगा। लेकिन अगर खुद को सब कुछ समझने लगेगा तो वह हर बात पर जताएगा कि उसके जैसा कोई नहीं है।
कुछ यूं करें - बच्चों को धरातल पर रखने की कोशिश करें। इस बात का ध्यान रखें कि अच्छे मार्क्स और अच्छी ग्रेड्स लाने के बाद भी वे नॉर्मल रहें। उसे यह बताएं कि वह दूसरे बच्चों की तरह ही है और अपने फ्रैंड ग्रुप का ही एक हिस्सा है। बच्चों में आपस में अच्छा कम्युनिकेशन रखने पर जोर दें। सबसे जरूरी यह है कि अपने बच्चे के सामने रोल मॉडल बनें।
जिद पर अड़ा
बेटा पिकनिक पर जाने के लिए इजाजत चाहता है, लेकिन आप इसके लिए उसे मना कर देते हैं। वह इस बात की रट तब तक नहीं छोड़ेगा, जब तक कि आप हामी नहीं भर देते हैं।
बालमन - साइकोलॉजी प्रोफेसर डॉ. मोनिका मोहन कहती हैं, ‘ बच्चे ना नहीं सुनना चाहते हैं और जब तक पैरेंट्स नहीं मान जाएं, अपनी बात उनके सामने दोहराते रहते हैं। कई बार वे खुद पर कंट्रोल नहीं रख पाते हैं और गुस्से में आ जाते हैं। वे यह भी जानते हैं कि अगर पैरेंट्स किसी बात से परेशान हैं और उनके पास उनकी बात सुनने के लिए टाइम नहीं है तो वे तुरंत हां कर देंगे।’
कुछ यूं करें – बच्चे को उसकी हद पार नहीं करने दें। पहली बार में ही उसे साफ कर दें कि वह कुछ भी कर ले, उसकी बात नहीं मानी जाएगी। बच्चा जब आपसे किसी बात के लिए पूछे, तो उसे एक बार में ही जवाब दें। अगर वह दूसरी बार पूछता है तो उस जगह से चले जाएं। आपका यह बर्ताव उसे यह समझाने के लिए काफी होगा कि वह कितनी ही जिद कर ले, उसकी बात नहीं मानी जाएगी।
इमोशनली ब्लैकमेल
आपके दोनों बच्चों में झगड़ा हो रहा है और आप किसी एक बच्चे की साइड ले रहे हैं। बच्चे के मुंह से सुनने को मिलता है कि आप भाई को ज्यादा प्यार करती हैं या आप मुझे पसंद नहीं करतीं।
बालमन – पैरेंट्स कई बार अपने एक बच्चे की तुलना दूसरे से करते हैं। हर बच्चे के लिए यह सबसे ज्यादा दुख की बात होती है कि पैरेंट्स उससे प्यार नहीं करते हैं। कई बार पैरेंट्स ऎसा व्यवहार तब भी करते हैं, जबकि खुद उन्होंने बचपन में इस तरह की तुलना का सामना किया हो।
कुछ यूं करें - बच्चों की आपस में तुलना करना बंद कर दें। समय-समय पर बच्चों के सामने प्यार जताएं और एक के सामने दूसरे की तारीफ करने से बचें। हां, योग्यता और काबिलियत की हमेशा तारीफ करें। ध्यान रहे आप एक बच्चे को प्यार कर रहे हैं तो दूसरे को भी गले लगाएं।
- ममता थपलियाल
साइकोलॉजी प्रोफेसर डॉ. मोनिका मोहन, साइकोलॉजिस्ट डॉ. कृष्णा कंवल और पीडियाट्रिक साइकोलॉजिस्ट डॉ. गौरव राजेंद्र से बातचीत पर आधारित