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5 जुलाई को भारत बंद होने की वजह से मैं स्कूल जा नहीं पायी, एक दिन मिस हो गया
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लेकिन अगले दिन बिना मिस किये मैं अपने प्ले स्कूल पहुँच गयी. पहला दिन तो बहुत अच्छा रहा.. वहां एक्टिविटीज और गेम्स में इतना मन लगा कि मेरा वहां से आने का मन नहीं हो रहा था. |
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ये मैं, अगले दिन स्कूल जाने के लिए सुबह सुबह तैयार
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अगले दिन मम्मा पापा ने मुझे स्कूल छोड़ दिया… और जाते ही मैं वहां एक्टिविटीज में बिजी हो गयी… और मम्मा पापा घर आ गए.
प्रिंसिपल मैम ने बताया की पैरेंट्स ज्यादा देर तक होते हैं तो बच्चे को अडजस्ट होने में टाइम लगता है.
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थोड़ी देर तो मैं बिजी थी पर जब घर की और मम्मा पापा की याद आई तो मैं थोड़ी रुआंसी हो गयी थी. अभी नया नया है ना… पर थोड़ी दिनों में मैं अडजस्ट हो जाउंगी… तब पढने में और मज़ा आएगा… |
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फिर मम्मा पापा मुझे लेने आ गए और मैं उनके साथ घर आ गयी…
अच्छा अब मुझे स्कूल की तैयारी करनी है… आपसे फिर मिलती हूँ… तब तक के लिए बाय बाय
- आपकी लवी
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अभी से पढना शुरू कर दिया?
लगे रहो।
हम तो छह साल के थे, जब पहली बार स्कूल पहुंचे। स्कूल तक ही बाप्पू लट्ठ लेकर पीछे-पीछे आते थे।
हा हा
भाई नीरज जाट की बात मै दम है, हम भी अह साल के थे तब जा कर स्कुल देखा था
बहुत प्यारी…
शुभकामनाएँ…
प्यार..
आज दूसरा दिन कैसा था?
थैंक्स अंकल
शुभकामनाएँ…
थैंक्स अंकल
बहुत अच्छा बेटा
स्कूल जाओ
बिना रोए
मिलोगे तो चॉकलेट खिलाऊंगा
प्रोमिस ??
बहुत अच्छा ,
थैंक्स माधव
muaaaaaaaaaaah meri bachi,लव यू.
अरे वाह .. अब स्कूल की नई नई बातें जानने को मिलेगी !!
जी जरूर
स्कूल की बातें सबसे प्यारी…मैं तो रोज जाती हूँ.
बहुत ही सुन्दर पोस्ट!
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इसकी चर्चा यहाँ भी की गई है-
http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/07/blog-post.html