| आजकल फीफा वर्ल्ड कप का फीवर चारो तरफ है. तो ऐसे में मैं कैसे पीछे रहती. तो मैं भी बॉल लेकर पहुँच गयी ग्राउंड में. | |
| अरे.. एक बात तो मैंने आपको बताया ही नहीं.. आज कल मैं गुडगाँव में हूँ. ज़ेबा बाजी और इशरत बाजी मुझे बहुत मिस कर रहे थे… और मैं भी… तो मैंने सोचा कुछ दिन गुडगाँव घूम आऊँ.
और फुपी-फुपा जी की मैरिज एनिवर्सरी भी तो है. |
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| तो मैं बता रही थी की कैसे मैं फूटबॉल खेलती हूँ. रोज़ शाम मैं, ज़ेबा बाजी और इशरत बाजी पहुँच जाते है पार्क में. हम कुछ अलग तरीके से खेलते हैं. फूटबॉल खेलने में पैर के साथ साथ क्रिकेट बैट का भी इस्तेमाल कर लेते हैं. |
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| ये देखिये, ये तिथि है. कभी कभी इसके साथ भी मैं खेलती हूँ. | |
| और जब खेलते खेलते थक जाओ तो, नरम नरम घास है ना… | |
| चलो अब थक गए… घर चलते हैं… | |
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आप खेलते हैं फूटबॉल ? खेला कीजिये अच्छा होता है अच्छा आप खेलिए फूटबॉल… मैं चली…. बाय बाय….
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- आपकी लवी
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फीफा वर्ल्ड कप का फीवर
15
Jun
Tuesday, 2010 | posted by: लविज़ा | Laviza
Filed under: Activities












फुटबाल और टी-२० का मिक्स… लगे रहो…
प्यार..
वैसे आजकल कान्हा हो? बहुत कम दिखाई देती हो?
अंकल, फिलहाल तो गुडगाँव घूमने आई हूँ
थक कर जब बेटू घर लौटी तो मम्मी ने मैगी खिलाई कि नहीं…इत्ते बड़े प्लेयर को.
नहीं अंकल
फूटबॉल शूटबॉल हाय रब्बा.. गोल कितने किये ये तो बता दो
अंकल, गोल करने का ऑप्शन ही नहीं था
बहुत अच्छा लवी, फ़ुटबाल का लुत्फ़
वाह वाह
चूऊऊ क्यूट…
थैंक यू रूबी बाजी
वाह!’फुटबाल′तो बहुत अच्छा खेलती हो !सभी तस्वीरें बड़ी ही सुन्दर हैं और आप की सहेली तिथि भी .