| उस दिन मम्मा जब बाज़ार से वापस आयी और जैसे ही सब्जियों का बैग रखा, मैं तुरंत ही मम्मा की हेल्प करने पहुँच गयी |
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| उसमें मुझे जो चीज सबसे ज़्यादा पसंद आयी, वो था पुदीना. बस मैने गुच्छे से कुछ उठाया और उड़न छू हो गयी |
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| हाँ, उसे खाकर भी देखा था मैने. पता नही स्वाद कैसा था, पर मुझे तो अच्छा लग रहा था. | |
| तभी पीछे से मम्मा आ गयीं मुझसे वो गुच्छा लेने. पर मैं भी कहाँ देने वाली थी. मैं तो वहाँ से भी भाग गयी. |
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| और फिर मज़े से पुदीना का स्वाद लिया.. आपने खाया है कभी ऐसे ? खाईये खाईये, मज़ा आता है. | |
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मैं तो चली, आप पुदीने का स्वाद लीजिये. बाय - आपकी लवी |
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आपने खाया है कभी ऐसे ?
8
Feb
Monday, 2010 | posted by: लविज़ा | Laviza
Filed under: Activities












बहुत बढ़िया बिटिया रानी..
so cute
अरे वाह लवि, पुदीना के पानी वाले गोल गप्पे आजमा कर देखना कभी.:)
रामराम.
खायेंगे बेटू..हम भी आज खायेंगे.
हम अभी पोदीने का स्वाद लेते है, आप तब तक कोई दूसरी खाने की चीज़ ढूँढो.
मै तो अब भी पोदीने की चटनी खाती हूँ तूने खाई चटनी कभी? तो खाना। लवि बहुत स्मार्ट हो रही हो आशीर्वाद्
मस्त..
अभी तक भोपाल में?
प्यार…
लवी ने तो बड़ा अच्छा आइडिया दिया…ना चटनी पिसने की झंझट ना गोलगप्पे का पानी बनाने की चिकचिक….हम भी ऐसे ही खा कर देखेंगे