मेरी पहली किताबें

6 Jan

Wednesday, 2010 | posted by: लविज़ा | Laviza

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मम्मा मेरे लिए बुक्स लेकर आयीं हैं. रंग बिरंगी हैं सारी.. अच्छी लगती हैं ये तो मुझे…

 

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अब मम्मा इतनी ख़ुशी से मेरे लिए किताबें लायीं थीं तो मुझे भी ख़ुशी से ही पढना चाहिए ना… इसलिए मैंने तो आते ही किताबें खोल कर पढनी शुरू कर दी.

  

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देखिये कितना दिल लगा कर पढ़ रही हूँ मैं…. (वैसे आप किसी को बताना नहीं.. .एक दो बार मैंने इन किताबों को चख कर भी देखा था :) )

सबसे पहले मम्मा ने मुझे बॉडी पार्ट्स पढ़ाना शुरू किया.. वैसे थोडा बहुत बॉडी पार्ट्स के नाम तो मैं जानती हूँ…

 
अच्छा अब आप ये पोस्ट पढ़िए, मैंने तो जा रही हूँ अपनी किताबें पढने….
आपसे बाद में मिलती हूँ…तब तक के लिए बाय 

- आपकी लवी

 

 





9 Comments

  1. वाह लवि बहुत पढाकू हो गयी हो कुछ खेल भी लिया करो। पढाई शुरू करने के लिये बहुत बहुत बधाई आशीर्वाद्

  2. Mahfooz Ali says:

    खूब मन लगा कर पढना…..

  3. खूब मन लगा कर पढ़ो!! ढेर आशीष!!

  4. vjइतनी रंग बिरंगी पुस्‍तके .. मुझे भी पढने की इच्‍छा हो रही है .. पर तुमने इसे चखा क्‍यूं ??

  5. इतनी रंग बिरंगी पुस्‍तके .. मुझे भी पढने की इच्‍छा हो रही है .. पर तुमने इसे चखा क्‍यूं ??

  6. देखते देखते लवि कितनी समझदार होती जारही है? घर पर पढाई शुरु भी करदी? बहुत आशीष और प्यार.

    रामराम.

  7. तुमको देखकर उधर पापा भी किताबे मांग रहे है..

  8. madhav says:

    अच्छा ? जल्दी ही आजादी छीन गई आपकी

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