मम्मा….. आफिछ …. आफिछ…. ??

24 Dec

Thursday, 2009 | posted by: लविज़ा | Laviza

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पहले जब मम्मा या पापा ऑफिस जाते थे तो मैं भी उनके साथ जाने की जिद करती थी. पर अब मैं समझदार हो गयी हूँ. मुझे पता है की ऑफिस तो जाना पड़ता है ना…
 
इसलिए अब जब मम्मा ऑफिस जाने के लिए तैयार हो रही होती हैं तो मैं रोज़ ऐसे पूछती हूँ, ” मम्मा… ओफिछ…. ओफिछ…. ?
 
फिर जब मम्मा हाँ में जवाब देती हैं, तो मैं फिर से अपने खेल में बिजी हो जाती हूँ.
 
क्यूँ है ना समझदारी वाली बात :)
 
 
  

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Christmas

कल क्रिसमस है और आप सभी को मेरी तरफ से क्रिसमस की अग्रिम बधाई…

 

फिर मिलते हैं…. बाय

 - आपकी लवी

 

 





16 Comments

  1. सच को तो स्‍वीकारना पडता है बेटे .. इसी में समझदारी होती है .. सचमुच तुम बडी हो गयी .. अब समझाना कैसा ??

  2. लवि को क्रिशमश की बधाई. और अब तो लवि समझदार ही नही होगई है बल्किल बाते ं भी समझदारी की करने लगी. ड्रेस बहुत ही सुंदर लग रही है. भोपाल मे नानी ने दिलवाई क्या?

    रामराम.

  3. जब मम्मी ओफिछ जाती है तो आप घर में किसके साथ रहते हो.. नानी के..?

    क्रिसमस की बधाई तो तुमको भी.. तुम्हारे पापा को तो मैं यहाँ पकड़ता हूँ..

  4. खूब समझदार और अच्छी बच्ची हो गई लवि…क्रिसमस पर क्या क्या गिफ्ट मिली..जरा दिखाओ तो.. :)

  5. واہ …..لوزا جی آپ تو بہت سمجھدار ہو گی ہیں ……مما آفس جاتی ہے اور آپ روتے بھی نہیں …..؟

    • रावेंद्रकुमार रवि says:

      हरकीरत जी,
      हम भी जानना चाहते हैं –
      क्या लिखा है, आपने लविज़ा के लिए?
      अनुरोध –
      इसे देवनागरी लिपि में भी लिख दीजिए!

  6. Abyaz says:

    सच बेटा.. तुम बहुत समझदार हो गई हो… जीती रहो..

  7. लवि बहुत अच्छी बच्ची है सब समझती है। तो क्रिसमस कैसे मनाया? बहुत बहुत आशीर्वाद्

  8. madhav says:

    नव वर्ष की बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ.

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