
पहले जब मम्मा या पापा ऑफिस जाते थे तो मैं भी उनके साथ जाने की जिद करती थी. पर अब मैं समझदार हो गयी हूँ. मुझे पता है की ऑफिस तो जाना पड़ता है ना…
इसलिए अब जब मम्मा ऑफिस जाने के लिए तैयार हो रही होती हैं तो मैं रोज़ ऐसे पूछती हूँ, ” मम्मा… ओफिछ…. ओफिछ…. ?
फिर जब मम्मा हाँ में जवाब देती हैं, तो मैं फिर से अपने खेल में बिजी हो जाती हूँ.
क्यूँ है ना समझदारी वाली बात
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कल क्रिसमस है और आप सभी को मेरी तरफ से क्रिसमस की अग्रिम बधाई…
फिर मिलते हैं…. बाय
- आपकी लवी
सच को तो स्वीकारना पडता है बेटे .. इसी में समझदारी होती है .. सचमुच तुम बडी हो गयी .. अब समझाना कैसा ??
लविज़ा के लिए नए साल का तोहफा –
लविज़ा आज से “सरस पायस” पर भी!
लविज़ा के लिए नए साल का तोहफा –
लविज़ा आज से “सरस पायस” पर भी!
लवि को क्रिशमश की बधाई. और अब तो लवि समझदार ही नही होगई है बल्किल बाते ं भी समझदारी की करने लगी. ड्रेस बहुत ही सुंदर लग रही है. भोपाल मे नानी ने दिलवाई क्या?
रामराम.
थैंक यु, ताऊ जी.
जब मम्मी ओफिछ जाती है तो आप घर में किसके साथ रहते हो.. नानी के..?
क्रिसमस की बधाई तो तुमको भी.. तुम्हारे पापा को तो मैं यहाँ पकड़ता हूँ..
जी अंकल
खूब समझदार और अच्छी बच्ची हो गई लवि…क्रिसमस पर क्या क्या गिफ्ट मिली..जरा दिखाओ तो..
अंकल, सेंटा अंकल तो अभी आये ही नही…. फिर कहाँ से गिफ्ट
संभल के रहना.
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अंग्रेज़ी का तिलिस्म तोड़ने की माया।
पुरुषों के श्रेष्ठता के ‘जींस’ से कैसे निपटे नारी?
واہ …..لوزا جی آپ تو بہت سمجھدار ہو گی ہیں ……مما آفس جاتی ہے اور آپ روتے بھی نہیں …..؟
हरकीरत जी,
हम भी जानना चाहते हैं –
क्या लिखा है, आपने लविज़ा के लिए?
अनुरोध –
इसे देवनागरी लिपि में भी लिख दीजिए!
सच बेटा.. तुम बहुत समझदार हो गई हो… जीती रहो..
लवि बहुत अच्छी बच्ची है सब समझती है। तो क्रिसमस कैसे मनाया? बहुत बहुत आशीर्वाद्
नव वर्ष की बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ.
नया वर्ष हो सबको शुभ!
जाओ बीते वर्ष
महके हृदय तुम्हारा!