आजकल मैं भोपाल में हूँ. इसलिए आपसे बातें नहीं हो पा रही है. इस बीच मैंने DTPw B1/DTPaB1, OPV5/IPV और Hib B1 का टीका भी लगवा लिया. कुछ कुछ शब्द भी बोलने लगी हूँ मैं. जैसे अदनान भाई को ‘अददा’, आयशा को ‘आछा’. पापा को कभी मैं पापा कहती हूँ और कभी कभी ‘पापे’…..
कल की बात बताऊँ.. टेबल पर चाबी का गुच्छा पड़ा था. पापा और मम्मी को हमेशा ही इससे घर का दरवाजा खोलते या बंद करते देखती थी तो सोचा आज मैं भी ट्राई करती हूँ.. और चाभी का गुच्छा लेकर दरवाजे के पास पहुँच गयी. गुच्छे में पांच चाबियाँ थी और मैंने एक एक कर सारे ट्राई करके देखे पर ताला तो खुला ही नहीं
यहाँ भोपाल में अदनान भाई और आयशा के साथ खूब मस्ती हो रही है.. मम्मी को कहती हूँ की यहाँ की तस्वीरें लें, तभी तो आपको दिखाउंगी.
और शरारतों के साथ आपसे बाद में मिलती हूँ… तब तक के लिए बाय…..
- आपकी लवी.












वाह पापे !
भोपाल तो बड़ी अच्छी जगह है..तुमको वहां घुमाया की नहीं? अब तुम बड़ी हो गयी हो और प्यारी भी…चश्में-बद्दूर
नीरज
खूब मस्ती करना वहाँ और अच्छी अच्छी तस्वीरें दिखाना
खूब खेलो लवि बिटिया अदनान भाई और आयशा के साथ…फिर मस्ती की पूरी खबर सुनाना!!!
तुम्हारी बाकी शरारतों की रिपोर्ट का इंतजार है.:)
निचे रामराम लगाना रह गया है सो उपर वाले कमेंट मे सबसे आखिर में रामराम पढा जाये.
रामराम.
अले! बेटा ….. खूब शरारत करना….