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आज मैं गुस्से में हूँ. क्यूँ गुस्से में हूँ ? पापा आज बाहर जा रहे थे और उन्हें तैयार होते देख कर मैंने भी जाने की जिद कर दी. और पता है पापा ने क्या किया. मुझे मम्मी के साथ छत पर छोड़ दिया और चीटिंग करके चुपके से चले गए.
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तो मुझे गुस्सा आ गया…
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मम्मी ने मुझे कितना मनाने की कोशिश की, मुझे साइकिल पर बैठा कर घुमाया भी. पर मुझे तो नहीं मानना था.
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फिर जब पापा आये तो उन्होंने भी मनाने की कोशिश की और साइकिल पर घुमाया भी…पर मुझे भी कहाँ मानना था
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बस बस,, मेरा गुस्सा ख़त्म नहीं हुआ.. वो तो मैं दूसरी छत पर खड़ी दीदी को हेलो बोल रही हूँ.
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- आपकी लवी
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अरे बहुत देर हो गयी .. अब मान भी जाओ बाबा !!
पापा से कहो कि अबसे बाजार घुमा लाओ तो लवि का गुस्सा छू हो जायेगा…थोड़ी सी चॉकलेट की ही तो बात है..
अरे लावि पापा को बोलो एक बार तुम्हे बाहर घुमा लाये बस हमारी बिटिया का गुस्सा गायब
भाई टॉफी वगैरा खा लो और पापा से सुलह कर लो इस उम्र में तुम्हारा गुस्सा होना शोभा नहीं देता है ….
Kya baat hai Lavi…Naraaz ho gayin tum..
jaldi maanNa nahin..ok?
ek milk chocolate lena..ek bada wala baloon…..aur bahar घुमा कर नहीं लायें न तब तक bilkul bhi नहीं manNa..ok???..:D
अली! बेटा क्यूँ गुस्सा है?
तुम्हारा गुस्सा एकदम जायज़ है, बेटा.
aare लवि gusse में भी क्यूट लगती है:),
लवि बिटिया गुस्से में तो तुम और भी प्यारी लग रही हो? कभी कभी गुस्सा भी करना अब सीख ही जाओ. वर्ना तुम्हारी बात कौन मानेगा?:)
जिसने तुम्हें गुस्सा करना सिखाया वह यह बताना भूल गया कि दो मिनट गुस्सा करके तीन मिनट का स्माइलिंग ब्रेक लेना होता है । तुम दोनों काम एक साथ कर रही है । यह नहीं चलेगा लवी ।
टॉफी मिली क्या? मेरी कहाँ है?
अले बेटा गुच्चा थीक नई ये।चाकलेत,आईतक्लीम ले लो औल हंस दो।
पापा की तो…
चलो अब तो खुश हो..
हूं तब तो ठीक ही है आपका गुस्सा.
न बेबी न, इतना गुस्सा ठीक नहीं। पापा ने चॉकलेट नहीं दी क्या?
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }
आपकी नाराजगी जायज़ है मगर हो सकता आपके लिए कुछ लाने गए होंगे.
अब बताओ कुछ लाये या नहीं…………….
लो पापा अब टॉफी लेकर आ गए हैं. हंसने की घंटी बजा दो. गुस्से का पेरिओद ख़त्म हुआ.
- सुलभ