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आपको तो पता है की जब भी पापा बाहर जाने के लिए तैयार होते हैं, मुझे पता चल जाता है और मैं जाकर उनसे लिपट जाती हूँ. २७ अक्टूबर को भी मैंने ऐसा ही किया… पर वो तो मुझे घुमाने ले जाने के लिए ही तैयार हो रहे थे. मम्मी पापा मुझे उस दिन ‘अमर जवान ज्योति’ लेकर गए थे. ‘अमर जवान ज्योति’ देश पर मर मिटने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि स्वरुप बनाया गया है. |
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हमने भी वहां शहीदों को श्रंद्धांजलि अर्पित की. कुछ तस्वीरें भी लायी हूँ. आप देखिये. |
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वहां खेलते हुए. |
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फव्वारे के पास |
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वापसी में विधानसभा की ली गयी तस्वीर. |
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