
आद्रा से आने के कुछ दिन बाद मेरी तबियत थोडी ख़राब हो गयी थी | डॉक्टर अंकल ने बताया था की कुछ भी नही बस मौसम का असर है पर मम्मी तो मेरी कुछ ज्यादा ही परेशान रहती है ना | पर कुछ नही दो तीन दिन में मैंने तो ठीक भी हो गयी | फिर तो मम्मी भी ऑफिस जाने लगी और मैंने नानी के साथ घर पर रहती थी | और हाँ मम्मी तो दिन भर ऑफिस से फ़ोन करती रहती थी नानी को की लवी कैसी है | मै तो मस्त रहती हूँ पर पता नही मम्मी इतना परेशान क्यों रहती थी हाँ अब भी मम्मी यही करती है | हाँ उस टाइम मैंने अपने हाथ पैर चलाना सीख रही थी | मैंने तो अपना दूध का बोतल ख़ुद ही पकड़ना भी सीख लिया था |

मम्मी कहती है की मैंने उस वक्त अपना अंगूठा मुंह में लेती थी पर मुझे तो याद नही | अब तो मैंने अंगूठा मुंह में नही लेती | मम्मी जब शाम को ऑफिस से घर आती थी तो मुझे बहुत प्यार करती थी वो तो अब भी करती है | उनका तो मन ही नही होता मुझे छोड़ कर ऑफिस जाने का | पर नानी है ना वो तो मुझे संभाल लेती है और मैंने उनको | ….. बाकि अगले पोस्ट में ….












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